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युद्ध के बदलते स्वरूप में 'नैरेटिव्स' हैं नए हथियार, स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन कॉनक्लेव में बोले लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता
लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि संघर्षों की प्रकृति में मूलभूत परिवर्तन हो चुका है. अब युद्ध केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. बल्कि सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी इसका हिस्सा बन चुके हैं.
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आधुनिक संघर्षों में नैरेटिव्स का उपयोग एक हथियार की तरह किया जा रहा है, जो नए प्रकार की चुनौतियां पैदा कर रहे हैं. यह बात भारतीय सेना की मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कही. लखनऊ कैंटोनमेंट स्थित सूर्य ऑडिटोरियम में आयोजित पहले स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन कॉनक्लेव में उन्होंने स्पष्ट किया कि रणनीतिक संचार केवल प्रतिक्रियात्मक या व्यक्ति-आधारित नहीं हो सकता, बल्कि इसे संस्थागत बनाते हुए सिद्धांत-समर्थित और क्षमता-संचालित प्रणाली के रूप में विकसित करना होगा. कॉन्क्लेव में राष्ट्रीय सुरक्षा के उभरते सूचना और संज्ञानात्मक आयामों पर व्यापक मंथन हुआ. कार्यक्रम में लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक, सरकारी संचार विशेषज्ञ, मीडिया प्रतिनिधि तथा सरकारी और निजी क्षेत्र के संचार पेशेवर शामिल थे.
युद्ध के बदलते स्वरूप पर जोर
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इस सम्मेलन में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक संचार को संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित करने और उभरते सूचना क्षेत्र में नीति, संरचना तथा प्रक्रियाओं से जुड़े व्यावहारिक सुझावों पर चर्चा की गई. सम्मेलन का उद्घाटन मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संघर्षों की प्रकृति में मूलभूत परिवर्तन हो चुका है और अब युद्ध केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी इसका हिस्सा बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि धारणा प्रबंधन आज निर्णायक भूमिका निभा रहा है. उनके अनुसार धारणा वैधता को आकार देती है, वैधता प्रभाव को आकार देती है और प्रभाव ही अंततः परिणाम तय करता है.
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उभरते सूचना क्षेत्र पर फोकस
सम्मेलन का मुख्य भाषण रक्षा और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ नितिन गोखले ने दिया. उन्होंने कहा कि आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य में सूचना का नियंत्रण, पर्सेप्शन बिल्डिंग और विश्वसनीयता राष्ट्रीय शक्ति के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं. उनके संबोधन ने पूरे सम्मेलन की चर्चाओं के लिए आधार तैयार किया. पहले विशेषज्ञ सत्र का विषय था - "उभरते सूचना क्षेत्र में भविष्य की तैयारी के लिए एक क्षमता के रूप में रणनीतिक संचार का संस्थागतकरण". इस सत्र का संचालन नितिन गोखले ने किया. राजदूत रुचिरा कंबोज (सेवानिवृत्त आईएफएस-संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि), राजदूत यशवर्धन सिन्हा (सेवानिवृत्त आईएफएस) और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने इस सत्र को संबोधित कर कई विषयों पर महत्वपूर्ण विचार रखे. क्ताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में रणनीतिक संचार को एक संस्थागत क्षमता के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और सूचना क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित राष्ट्रीय दृष्टिकोण की जरूरत बताई.
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विशेष संवाद सत्र में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर हुई चर्चा
सम्मेलन में एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया, जिसका विषय था "उभरते बहु-क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार: रणनीतियां, संरचनाएं, प्रक्रियाएं और तत्परता". इस सत्र का संचालन लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने किया. सत्र को राजदूत दिलीप सिन्हा (सेवानिवृत्त आईएफएस), डॉ. शांतनु मुखर्जी (सेवानिवृत्त आईपीएस), वीणा जैन (सेवानिवृत्त आईआईएस), शरत चंदर (सेवानिवृत्त आईआईएस) और लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे (सेवानिवृत्त) ने संबोधित किया. इसमें मल्टी-डोमेन अभियानों में रणनीतिक संचार की भूमिका, संस्थागत ढांचे और समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे गए.
पैनल चर्चा में मीडिया और सूचना शक्ति पर विमर्श
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सम्मेलन के दौरान मीडिया के साथ दो प्रमुख पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं. पहली पैनल चर्चा "शेपिंग द माइंड स्पेस" विषय पर हुई, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार संदीप उन्नीथन, शिवानी शर्मा और स्नेहेष फिलिप ने सूचना युद्ध, धारणा निर्माण और मीडिया की भूमिका पर विचार रखे. दूसरी पैनल चर्चा "सूचना शक्ति और रणनीतिक संचार" विषय पर केंद्रित थी, जिसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार पंकज जायसवाल ने किया. इस सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मनीष प्रसाद और अशोक श्रीवास्तव ने सूचना शक्ति, मीडिया प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में रणनीतिक संचार की भूमिका पर चर्चा की.
समापन सत्र में प्रस्तुत किया गया सार
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दिन भर चली विभिन्न चर्चाओं और सत्रों के बाद मध्य कमान मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं और निष्कर्षों का सार प्रस्तुत किया. उन्होंने प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों को समझने और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.