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I-PAC दफ्तर छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ED, न्यायालय ने ममता सरकार को लगाई फटकार, दखल ना देने की दी नसीहत

ED vs I-PAC SC Hearing: आई-पैक दफ्तर ईडी रेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए ममता सरकार को फटकार लगाई है..

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जैसे-जैसे बंगाल में चुनाव करीब आ रहे है, वैसे-वैसे कड़ाके की ठंड में भी बंगाल की सियासत गरमाती जा रही है. कोई शक नहीं कि ममता बनर्जी एक दमदार नेता हैं, राजनीतिक पिच पर कैसे बल्लेबाजी करनी है, ममता बनर्जी अच्छी तरह से जानती हैं, इसीलिए साल 2011 से लेकर अब तक लगातार तीन बार से पश्चिम बंगाल की कुर्सी पर बैठती आ रही हैं. आगामी विधानसभा चुनाव में ममता सरकार को उखाड़ फेंकना विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, तो वहीं बंगाल में अपने दबदबे को क़ायम रखना, ममता बनर्जी के लिए भी बड़ी अग्निपरीक्षा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को दिया बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पिछले दिनों आई-पैक (I-PAC) के दफ्तर में हुई ईडी रेड का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. ईडी ने बंगाल पुलिस पर ममता सरकार की मदद करने का आरोप लगाया था, ये मामला सुप्रीम कोर्ट के चौखट तक पहुंचा, न्यायालय ने दलील सुनी और नोटिस जारी करते हुए बंगाल सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है. कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि एजेंसी की जाँच में दख़ल नहीं दिया जा सकता है. 

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ED ने ममता सरकार पर क्या लगाया था आरोप?

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ईडी की ओर से दावा किया गया था राज्य पुलिस ने साक्ष्यों के साथ ‘छेड़छाड़’ और ‘चोरी’ करने में ममता सरकार की मदद की है. इसके अलावा ईडी के एक अधिकारी का फ़ोन भी ले लिया गया था. ईडी का ये भी आरोप है कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ख़ुद मौके पर पहुंचीं और जांच अधिकारियों के लैपटॉप, महत्वपूर्ण दस्तावेज और मोबाइल फ़ोन जबरन छील लिए. 

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार!

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पूरी घटना के बाद ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों की जाँच और राज्य अधिकारियों द्वारा कथित दख़ल के बारे में एक गंभीर मुद्दा उठाती है. सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देते हुए कहा कि किसी भी एजेंसी को चुनाव के काम में दख़ल देने का अधिकार नहीं है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर जवाब दाखिल किया जाए. 

पश्चिम बंगाल में वर्चस्व की लड़ाई?

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साल 2011 से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता सँभाल रही हैं. तीन बार लगातार मुख्यमंत्री बन चुकि हैं. ममता बनर्जी से पहले पश्चिम बंगाल में लगातार 34 सालों वाम मोर्चा की सरकार थी, जिसे साल 2011 में ममता ने बंगाल से उखाड़ फेंका. अब ममता बनर्जी भी लगातार 15 सालों सत्ता संभाली हुई हैं. अगर इस बार ममता जीतती हैं तो ये चौथी बार लगातार जीत होगी. ऐसे में बंगाल में ममता बनान अन्य के बीच एक तरह से वर्चस्व की लड़ाई भी है. ममता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है. इसलिए बीजेपी से लोहा लेने के लिए ममता हर वो राजनीतिक पैंतरा अपना रही हैं, जिसके माध्यम से सूबे के अंदर बीजेपी को बढ़त न मिले. वहीं, बीजेपी के लिए ममता सरकार को उखाड़ फेंकना ही एक मात्र उद्देश्य है. अब देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कौन किस पर भारी पड़ता है.  

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