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Ankita Bhandari Case: हैवानों की ये हंसी बता रही है न्याय अभी ‘अधूरा’ है!

Ankita Bhandari के हत्यारों को भले ही उम्र कैद की सज़ा मिल गई हो लेकिन परिवार इससे खुश नहीं है. वह अभी भी इस न्याय को अधूरा बता रहा है. वहीं, Court से सजा सुनाए जाने के बाद दोषी Saurabh Bhaskar हंसते हुए बाहर निकला और जो बेशर्मी दिखाई, उसने एक नई बहस छेड़ दी है.

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पौड़ी की बेटी, अंकिता भंडारी का कसूर बस इतना था कि उसने खुद की देह का सौदा करने से मना कर दिया था. उसकी गलती बस इतनी थी कि उसने आत्मनिर्भर बनने का सपना देखा था, उसका गुनाह बस इतना था कि वह अपने परिवार का सहारा बनना चाह रही थी. पहाड़ की एक 19-20 साल की लड़की जिसे सिर्फ़ इसलिए मार डाला गया क्योंकि वह ग़लत के आगे नहीं झुकी. उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी केस में गुनहगारों को सज़ा तो मिल गई है लेकिन बेशर्मी वो कम नहीं हुई, उसका हिसाब कौन लेगा. अदालत जब अंकिता के दोषियों को सजा सुना रही थी उस दौरान एक तरफ अंकिता के मां-बाप की आंखे ग़म और ग़ुस्से से नम थी तो दूसरी ओर उसके कातिल हंस रहे थे…वो हंसी…जो हैवानियत से भरी थी. ये है समाज का दोहरा मयार.

चेहरे पर बड़ी सी हंसी, हवा में हाथ लहराता एक शख्स जो ना कोई हीरो है, ना कोई नेता, ना कोई बड़ी शख़्सियत, वो है एक दरिंदा, एक हैवान, एक अपराधी, जिसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है, सजा मिलने के बाद भी कोई चेहरे पर शिकन नहीं है, जैसे मानों वो निश्चिंत हो कि सज़ा मिली है तो ज़मानत भी मिल ही जाएगी, अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषी सौरभ भास्कर कोर्ट से बाहर निकलते ही बेशर्म की तरह हंसता और नेताओं की तरह हाथ हिलाता हुआ कैमरे में कैद हो गया. सौरभ अंकिता भंडारी के उन तीन गुनहगारों में शामिल है जिन्हें कोर्ट से उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी. लेकिन सज़ा के बाद सौरभ की ये हंसी…अंकिता के मां बाप को सज़ा दे रही थी. सबको लग रहा था सज़ा मिलने के बाद तो कम से कम उन्हें अपने किए का अहसास होगा, लेकिन असलियत आपकी आँखों के सामने है. एक बार जरा वीडियो देखिए…सौरभ को वैन की ओर ले जाती पुलिस...वो हंसते हुए आता है…फिर वैन में चढ़ने से पहले सौरभ मुड़कर लोगों की ओर देखता है…चेहरे पर बड़ी सी हंसी थी…फिर वह हवा में हाथ लहराता है..इसके बाद हंसते हुए वैन में चढ़ जाता है…बिल्कुल रिलैक्स होकर…

अंकिता भंडारी केस में कोर्ट ने तीन आरोपियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है. अपराधियों में BJP नेता और पूर्व मंत्री का बेटा पुलकित आर्य, कर्मचारी सौरभ और अंकित गुप्ता शामिल है. कोर्ट ने माना है कि इन्हीं तीनों ने मिलकर पहले अंकिता की हत्या की. इसके बाद शव को छिपाने की कोशिश की. 2 साल 8 महीने की सुनवाई के बाद दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई. लेकिन अंकिता के माता-पिता इसे अधूरा न्याय मानते हैं. कोर्ट में सुनवाई के बाद अंकिता की मां सोनी देवी ने कहा, इस फैसले से मेरी बेटी की आत्मा को आंशिक रूप से शांति मिली होगी. उन्होंने हमारी बेटी के साथ इतना बुरा किया और हमारी जिंदगी नरक बना दी. मैं संतुष्ट तब होती अगर मेरे जीते-जी उन्हें फांसी की सजा मिलती. यह दुख एक मां ही समझ सकती है कि एक बेटी को खोने का दर्द क्या होता है. जनता की वजह से आज हमें यह पहली जीत मिली है. अब यह लड़ाई और बड़ी हो गई. 

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वहीं, पिता वीरेंद्र भंडारी भी फ़ैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने कहा, जिस तरह मेरी निर्दोष लड़की को मारा है उस हिसाब से हमारे जीते जी इनको फांसी की सजा होनी चाहिए थी. बहुत सारे लोग बच गए हैं. रिसॉर्ट को तोड़ा गया और जानबूझकर सबूत नष्ट किए गए. 

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अंकिता भंडारी मर्डर केस क्या है?
19 साल की अंकिता पौड़ी के डोभ श्रीकोट की रहने वाली थी, वह ऋषिकेश में वंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी. यह रिसॉर्ट BJP नेता के बेटे पुलकित आर्या का था. सितंबर 2022 में पहली बार अंकिता के लापता होने की ख़बर आती है. चार दिन बाद अंकिता का शव चीला नहर से बरामद किया गया. पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि पुलकित आर्या अंकिता को लेकर ऋषिकेश गया था. कुल 4 लोग ऋषिकेश गए थे लेकिन वापस तीन ही लौटे. वापस लौटकर पुलकित ने अंकिता के लिए झूठी कहानी सुनाई. लेकिन रिसॉर्ट के कर्मचारियों से सख़्ती से पूछताछ की गई. तो सारा भेद खुल गया. पुलिस ने ऋषिकेश के रास्ते पर लगे हुए तमाम CCTV कैमरों के फुटेज चेक किए जिसमें जाते हुए 4 लोग थे लेकिन आते हुए तीन ही दिखे.

जांच में सामने आया कि, अंकिता को एक VIP गेस्ट को स्पेशल ट्रीटमेंट देने के लिए मजबूर किया जा रहा था. अंकिता इसके लिए तैयार नहीं थी. उसने रिसॉर्ट में चल रही इस तरह कि गतिविधियों का विरोध भी किया. वहीं, इस मामले में अंकिता की वॉट्सऐप चैट भी बड़े सबूत बने. व्हाट्सएप चैट्स में साफ़ दिखा कि, पुलकित उसे बार-बार ग्राहक को ख़ास सेवा देने के लिए फ़ोर्स कर रहा था. यहां ख़ास सेवा से मतलब सेक्शुअल रिलेशन से था. जिसके लिए अंकिता बिल्कुल तैयार नहीं थी. अंकिता ने अपने दोस्त को मैसेज करते हुए अपनी परेशानी बताई थी. उसने कहा था, “मैं गरीब हूं, लेकिन क्या मैं खुद को 10,000 में बेच दूंगी ?”

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अंकिता अपने आप का सौदा करने के लिए तैयार नहीं थी. वह रिसॉर्ट में चल रही अवैध गतिविधियों का विरोध कर रही थी. कई दिनों से मानसिक तनाव का सामना कर रही थी. वह पुलकित के ख़िलाफ़ कोई शिकायत करती इससे पहले ही दरिंदों ने उसकी जान ले ली. और अपने सपनों को पंख देने निकली गरीब परिवार की बेटी, वापस लाश बनकर ही लौटी.

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