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बारिश, हरियाली और झरनों का संगम देखना है तो चले आइए रीवा, इस मानसून के लिए है बेस्ट डेस्टिनेशन

जब भी मानसून की बात होती है, तो मन हरियाली, बहते झरनों और ठंडी बयार की ओर भागता है. अगर आप भी इस बार रूटीन से हटकर किसी शांत, हरे-भरे और झरनों से भरे लोकेशन की तलाश में हैं, तो रीवा (Rewa) आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. मध्य प्रदेश का यह जिला प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों और ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर है — लेकिन ट्रैवलर्स के बीच अभी भी बहुत हद तक अनएक्सप्लोर्ड है.

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जब भी मानसून की बात होती है, तो मन हरियाली, बहते झरनों और ठंडी बयार की ओर भागता है. अगर आप भी इस बार रूटीन से हटकर किसी शांत, हरे-भरे और झरनों से भरे लोकेशन की तलाश में हैं, तो रीवा (Rewa) आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है. मध्य प्रदेश का यह जिला प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों और ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर है — लेकिन ट्रैवलर्स के बीच अभी भी बहुत हद तक अनएक्सप्लोर्ड है.
 
मानसून में क्यों जाएं रीवा?
 
मानसून में रीवा का रूप पूरी तरह बदल जाता है. यहां के जंगल और घाटियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं, और पहाड़ों से गिरते झरनों की आवाज़ जैसे दिल को सुकून देती है. यहां कई ऐसे झरने हैं जो मानसून में अपने पूरे सौंदर्य पर होते हैं — और फोटोग्राफी, ट्रेकिंग या सिर्फ नेचर लविंग के लिए एकदम परफेक्ट हैं.
 
रीवा के प्रमुख झरने जो आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे
 

बहुती जलप्रपात (Bahuti Waterfall)
यह मध्य प्रदेश का सबसे ऊंचा झरना है, जिसकी ऊंचाई करीब 145 मीटर है. जब बारिश के बाद यह फुल फ्लो में आता है, तो इसकी गूंजती आवाज़ और गिरते पानी का दृश्य किसी भी नेचर लवर का दिल जीत लेता है.

केवटी जलप्रपात (Keoti Waterfall)
रीवा से लगभग 40 किमी दूर स्थित यह झरना भी मानसून में काफी लोकप्रिय हो जाता है. ऊंचे चट्टानों से गिरता पानी और उसके चारों ओर घना जंगल इसे खास बनाते हैं.

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चचाई जलप्रपात (Chachai Waterfall)
करीब 130 मीटर की ऊंचाई वाला यह झरना Tons नदी पर स्थित है. चचाई झरना एक प्राकृतिक अजूबा है, जो मानसून के समय पूरे शबाब पर होता है.

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पुरवा जलप्रपात (Purwa Waterfall)
यह Tons नदी पर ही स्थित है और अपनी गिरावट व शोर से मन मोह लेता है. यहां से सूर्यास्त देखना भी एक अलग ही अनुभव देता है.

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क्या करें रीवा में?
  • फोटोग्राफी: झरनों, हरियाली और घाटियों में आप बेहतरीन नैचुरल शॉट्स ले सकते हैं.
  • ट्रेकिंग और पिकनिक: कुछ झरनों तक पहुंचने के लिए छोटा ट्रेक भी करना होता है, जो एडवेंचर को और रोमांचक बना देता है.
  • स्थानीय व्यंजन: रीवा की स्ट्रीट फूड और देसी स्वाद मानसून के मौसम में और भी स्वादिष्ट लगते हैं.
  • इतिहास से जुड़ाव: अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं तो रीवा किला, गोविंदगढ़ किला और व्हाइट टाइगर सफारी भी घूम सकते हैं.
कैसे पहुंचें रीवा?
  • रेल मार्ग: रीवा रेलवे स्टेशन देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा है.
  • सड़क मार्ग: रीवा, सतना, इलाहाबाद और जबलपुर से अच्छी तरह से कनेक्टेड है.
  • निकटतम एयरपोर्ट: प्रयागराज (इलाहाबाद) या जबलपुर एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर पहुंचा जा सकता है.
कब जाएं?
जुलाई से सितंबर के बीच मानसून का असली जादू रीवा में देखने को मिलता है. झरने अपने चरम रूप में होते हैं और मौसम भी सुहावना रहता है.
 
रीवा — एक मानसूनी जन्नत
 
अगर आप भागती-दौड़ती जिंदगी से एक ब्रेक चाहते हैं, अगर आप चाहते हैं कुछ ऐसा जो आपको फिर से तरोताज़ा कर दे — तो इस मानसून रीवा की वादियों और झरनों का सफर आपकी आत्मा को सुकून दे सकता है. न शोर, न भीड़ — सिर्फ नेचर की आवाज़, पहाड़ों की शांति और बहते झरनों की ठंडक. तो इस बार ट्रैवल लिस्ट में कोई भीड़भाड़ वाला टूरिस्ट प्लेस नहीं, बल्कि रीवा को शामिल कीजिए — जहां की प्राकृतिक खूबसूरती, बारिश में बहते झरने और हरियाली से ढकी वादियां आपको ऐसा एहसास देंगी जिसे आप ज़िंदगीभर याद रखेंगे.
 
चलें फिर? इस मानसून एक यादगार सफर पर — रीवा की ओर!
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