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मायोंग गांव: असम में बसी काले जादू की नगरी

क्यों मायोंग माना जाता है काले जादू की नगरी?
मायोंग गांव और उसका काले जादू से गहरा संबंध क्या है?
भीम पुत्र घटोत्कच का मायोंग गांव से क्या जुड़ाव है?
पुरातन काल में यहाँ नरबलि की प्रथा का क्या महत्व था?

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भारत की भूमि प्राचीन काल से कई रहस्यों और अद्भुत घटनाओं की गवाह रही है। एक ऐसा रहस्यमयी गांव, जहाँ के लोग काले जादू की गहरी समझ रखते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे सिखाने की परंपरा निभाई जाती है। यह रहस्यमयी गांव असम राज्य में स्थित है, जिसे मायोंग कहा जाता है। मायोंग को काले जादू का नगर माना जाता है। कहा जाता है कि यहां के लोग और यहां की धरती कुछ रहस्यमयी और शक्तिशाली ताकतों से जुड़ी हुई हैं। यह गांव अपनी ऐतिहासिक और पारंपरिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जो आज भी यहां के लोगों की ज़िंदगी में गहरे रूप से समाहित हैं। यही कारण है कि यह जगह हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, वहीं दूसरी ओर यह डर और आशंका का भी कारण बनती रही है।

मायोंग में क्या है डरावना?
मायोंग की सबसे डरावनी बात यह है कि यहां के लोग और स्थान एक गहरी रहस्यमय शक्ति से जुड़े हुए हैं। यहां के कुछ पुरातात्त्विक स्थल और मंदिर आज भी उन तंत्रिक विधाओं के प्रभाव में हैं, जो मानव बलि और काले जादू से संबंधित थीं। कई लोग कहते हैं कि इस गांव में रात के समय जाने से आपकी आत्मा विचलित हो सकती है, क्योंकि तंत्र-मंत्र से जुड़े स्थानों पर फैलने वाली ऊर्जा आपको भ्रमित कर सकती है।

यहां के पुराने मंदिरों और घने जंगलों में जाने पर यह अनुभव हो सकता है कि कोई शक्ति आपको घूर रही हो। कुछ लोग कहते हैं कि मायोंग में अकेले जाना खतरे से खाली नहीं है; यहां की अदृश्य शक्तियां मानसिक तनाव उत्पन्न कर देती हैं और डर, खौफ की भावना को जागृत करती हैं।

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तंत्र-मंत्र की शक्ति
हालांकि मायोंग में काले जादू करने वाले पारंपरिक लोग अब नहीं रहे, इन पारंपरिक जादूगरों को "ओझा" या "बेज़" कहा जाता था, और ये जादू पीढ़ी दर पीढ़ी सिखाए जाते थे। बेज़ द्वारा किया गया जादू इलाज के रूप में कार्य करता था। जो मंत्र अच्छे माने जाते थे, वही दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए किए गए मंत्र "कु मंत्र" होते थे। बेज़ को दोनों प्रकार के मंत्रों का प्रयोग आता था।

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आज भी, काले जादू का इस्तेमाल स्थानीय लोग इलाज के रूप में करते हैं। कुछ जादुई संस्कार जो यहां के लोग करते हैं, वे निम्नलिखित हैं:

तेज़ रखोवा मंत्र (खून के बहाव को रोकने के लिए)
नारेंगर मंत्र (रीढ़ की हड्डी में फोड़ा ठीक करने के लिए)
उशाह शुलर मंत्र (सांस लेते समय दर्द से राहत पाने के लिए)
बिचर शंग गुचुआ मंत्र (बालों वाले कैटरपिलर के काटने का इलाज
)

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एक आश्चर्यजनक जादू भी है जिसमें एक तांबे की थाली को पीठ पर रखकर और मंत्र उच्चारण करने से केवल दर्द का पता चलता है, बल्कि मंत्रों के उच्चारण से उसका इलाज भी किया जाता है। यह तांबे की थाली पीठ पर प्रभावित क्षेत्र पर चिपक जाती है और सारा दर्द अपने साथ खींच लेती है।

प्राचीन काल से ही मायोंग जादुई शक्तियों का गढ़ रहा है, और आज भी देशभर से लोग असम के मायोंग में काले जादू को देखने आते हैं। यह केवल एक अद्भुत दृश्य है, बल्कि देशभर में प्रसिद्ध भी है।

इतनी ताकतवर हैं यहां की तंत्र-मंत्र विधियां कि सदियों पहले मुग़ल सम्राट मोहम्मद शाह को भी यहां की जादुई शक्तियों ने अपनी पकड़ से बाहर नहीं निकलने दिया था। यह एक प्रसिद्ध तथ्य है, और आलमगीर नामा में भी कहा गया है कि एक लाख घुड़सवारों के साथ मोहम्मद शाह के आक्रमण के बावजूद मुग़ल असम की भूमि पर कब्जा नहीं कर सके। कहा जाता है कि उनकी पूरी सेना जादू-टोने की भूमि में नष्ट हो गई और उनका कोई नाम--निशान तक नहीं बचा।

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मायोंग कैसे पहुंचे
मायोंग गांव भारत के असम राज्य के मोरीगांव जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए विभिन्न मार्ग उपलब्ध हैं:

    हवाई मार्ग से:
    मायोंग का निकटतम हवाई अड्डा गुवाहाटी हवाई अड्डा है।
    गुवाहाटी हवाई अड्डे से आप मोरीगांव तक टैक्सी या बस से जा सकते हैं, जो लगभग 70 किलोमीटर दूर है।
    मोरीगांव पहुंचने के बाद, आप स्थानीय टैक्सी या ऑटो-रिक्शा लेकर मायोंग गांव तक पहुंच सकते हैं।
    रेल मार्ग से:
    मायोंग का निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है।
    गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से आप मोरीगांव तक टैक्सी या बस से जा सकते हैं, और फिर वहां से मायोंग तक पहुंच सकते हैं।
    सड़क मार्ग से:
    मायोंग गांव सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आप गुवाहाटी या अन्य नजदीकी शहरों से सीधे बस या टैक्सी लेकर मायोंग पहुंच सकते हैं। गुवाहाटी से मायोंग तक यात्रा में आमतौर पर 3-4 घंटे का समय लगता है, जो पूरी यात्रा को आसान बनाता है।

भीम पुत्र घटोत्कच से जुड़ा मायोंग का रहस्य

घटोत्कच महाभारत के एक प्रसिद्ध पात्र थे, जिनका संबंध राक्षसों से था। वे भीम और हिडिंबा के पुत्र थे, और महाकाली की भक्त मानी जातीं थीं। घटोत्कच अपनी अद्भुत शक्ति और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे।

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मायोंग गांव में घटोत्कच का संबंध तंत्र-मंत्र से जुड़ा हुआ था। उनके बारे में यह मान्यता है कि उन्हें एक अदृश्य शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त था, जिससे वे किसी भी दुश्मन का आसानी से मुकाबला कर सकते थे। यहां यह भी कहा जाता है कि घटोत्कच ने अपने तंत्रिकों के माध्यम से युद्ध और शक्ति की शिक्षा ली थी, और उनके द्वारा स्थापित किए गए तंत्र-मंत्र आज भी गांव में प्रचलित हैं।

शक्तियां हासिल करने हेतु प्रेमियों की बलि

मायोंग में प्रेमियों की बलि देने की प्रथा का उल्लेख भी मिलता है। मान्यता थी कि यदि किसी व्यक्ति ने तंत्र-मंत्र की मदद से अपनी प्रेमिका को आकर्षित किया है, तो अपने प्रेम संबंधों को मजबूत करने के लिए उसे एक बलि देनी पड़ती थी। इस प्रथा के अंतर्गत, प्रेमी और प्रेमिका के संबंधों की मजबूती के लिए बलि का उपाय किया जाता था, हालांकि यह प्रथा अब अधिक प्रचलित नहीं रही है, फिर भी इसके संकेत यहां के इतिहास और संस्कृति में मिलते हैं।

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मायोंग केवल असम की एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि एक रहस्यमयी स्थल भी है, जहां आज भी प्राचीन तंत्र-मंत्र और जादुई शक्तियां जीवित हैं। इस अद्भुत गांव के रहस्यों को जानने के लिए, दुनिया भर से लोग यहां आते हैं और इसे एक अद्वितीय अनुभव मानते हैं।

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