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लोकपाल को चाहिएं 7 BMW कारें... टेंडर निकाला, जानें कीमत और फीचर्स, जो बनातें हैं इन्हें बेहद खास
BMW 330Li: भारत के लोकपाल कार्यालय ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने 7 लग्जरी BMW 330Li LWB (लॉन्ग व्हील बेस) कारें खरीदने के लिए एक सार्वजनिक टेंडर जारी किया है.
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BMW 330Li: भारत के लोकपाल कार्यालय ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने 7 लग्जरी BMW 330Li LWB (लॉन्ग व्हील बेस) कारें खरीदने के लिए एक सार्वजनिक टेंडर जारी किया है. इन गाड़ियों की कीमत हर एक के लिए करीब 70 लाख रुपये से भी ज्यादा बताई जा रही है. इसका मतलब है कि कुल 7 कारों पर सरकार के खर्च का अनुमान 5 करोड़ रुपये से अधिक लगाया जा रहा है. लोकपाल कार्यालय का कहना है कि ये कारें उनकी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक ज़रूरतों को बेहतर करने के लिए खरीदी जा रही हैं. यह टेंडर 16 अक्टूबर को जारी किया गया और सभी इच्छुक कंपनियों को कहा गया है कि वे 7 नवंबर से पहले अपनी बोली जमा करें। यानी टेंडर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सभी के लिए खुली है.
गाड़ियों के साथ मिलेगी ड्राइवर्स को ट्रेनिंग
BMW कंपनी सिर्फ गाड़ियां ही नहीं देगी, बल्कि लोकपाल के ड्राइवरों और स्टाफ को 7 दिन की ट्रेनिंग भी देगी. इस ट्रेनिंग में गाड़ियों के हर फीचर, सिस्टम और उनके सही इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महंगी गाड़ियों का उचित और सुरक्षित इस्तेमाल हो.
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भारतीय बाजार के लिए बनी ये खास BMW कार
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BMW की जो कारें खरीदी जा रही हैं, वो BMW 330Li M Sport वेरिएंट की हैं, जो कि 3 सीरीज़ का लॉन्ग व्हील बेस मॉडल है. खास बात ये है कि इसे भारत के बाजार को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. इस कार का निर्माण BMW के चेन्नई स्थित प्लांट में होता है. 2025 मॉडल के तौर पर यह गाड़ी अभी हाल ही में लॉन्च हुई है. यह गाड़ी ना सिर्फ दिखने में शानदार है, बल्कि इसके अंदर बैठने वालों को भी जबरदस्त आराम देती है। पीछे की सीटों में इतना लेगरूम होता है कि यात्रियों को बिजनेस क्लास जैसी फीलिंग आती है। यही वजह है कि ये गाड़ियां अक्सर बड़े अधिकारियों और अमीर परिवारों द्वारा पसंद की जाती हैं।
दमदार परफॉर्मेंस और शानदार कम्फर्ट
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BMW 330Li में 258 हॉर्सपावर वाला इंजन लगा होता है, जो बेहद स्मूथ और रिस्पॉन्सिव है. चाहे शहर में गाड़ी चलानी हो या हाईवे पर तेज़ी से ओवरटेक करना हो, यह कार हर स्थिति में बेहतरीन प्रदर्शन देती है. इसमें सॉफ्ट सस्पेंशन दिया गया है, जो भारतीय सड़कों पर झटकों को कम करता है और आरामदायक सफर सुनिश्चित करता है. इसके लॉन्ग व्हील बेस होने के बावजूद भी इसमें बॉडी रोल कंट्रोल रहता है, जिससे गाड़ी बैलेंस्ड रहती है.
क्या है लोकपाल और क्यों बनाई गई यह संस्था?
लोकपाल एक ऐसा संस्थान है जिसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए बनाया गया था. यह संस्था 2013 में लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम के तहत बनाई गई और 2014 में इसे लागू किया गया. इसका काम सरकारी अफसरों और नेताओं के खिलाफ आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करना है.
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य होते हैं. इनमें से आधे सदस्य न्यायिक पृष्ठभूमि से होने जरूरी हैं। अध्यक्ष आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज होते हैं। सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति द्वारा की जाती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रसिद्ध व्यक्ति शामिल होते हैं.
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अब तक की नियुक्तियां और आलोचनाएं
भारत के पहले लोकपाल बने थे न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष, जिन्हें 2019 में नियुक्त किया गया।.फिलहाल लोकपाल के अध्यक्ष हैं सेवानिवृत्त जज अजय मणिकराव खानविलकर, जिन्हें राष्ट्रपति ने फरवरी 2024 में नियुक्त किया और उन्होंने मार्च 2024 में पदभार संभाला.
हालांकि, लोकपाल संस्था पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी पार्टियों का आरोप रहा है कि यह संस्था राजनीतिक दबाव में काम करती है और इसकी नियुक्तियों में निष्पक्षता की कमी है.कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियों का कहना है कि लोकपाल का गठन बहुत देर से हुआ और इसकी स्वतंत्रता भी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं है.
संसाधनों की कमी से जूझता लोकपाल कार्यालय
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भले ही लोकपाल का गठन भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए हुआ हो, लेकिन इसकी वास्तविक ताकत सीमित रही है. स्टाफ और बजट की भारी कमी इसकी सबसे बड़ी समस्या रही है. 2019 से अब तक इस संस्था के पास पूरा स्टाफ नहीं है, 2022 की एक संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक लोकपाल ऑफिस में केवल 30-40% स्टाफ ही उपलब्ध था.
यहां तक कि लोकपाल के एक पूर्व सदस्य जस्टिस दिलीप भोंसले ने 2021 में इस्तीफा देते हुए यही बात कही कि पर्याप्त संसाधन न मिलने से कामकाज प्रभावित हो रहा है. इससे शिकायतों की जांच और निपटारा बहुत धीमा हो गया है.
गाड़ियों की खरीदी पर उठ सकते हैं सवाल
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लोकपाल जैसी संस्था, जिसका काम भ्रष्टाचार से लड़ना और पारदर्शिता लाना है, अगर वह महंगी लग्जरी कारें खरीदती है, तो लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है. जब संस्था खुद स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रही हो, तो 5 करोड़ रुपये की BMW कारों की खरीदी पर आलोचना भी हो सकती है,
हालांकि, लोकपाल का तर्क है कि यह कदम उनकी प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए है, लेकिन फिर भी यह ज़रूरी है कि ऐसे फैसले पारदर्शिता और ज़रूरत के आधार पर लिए जाएं.