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Uber के खिलाफ CCPA का नोटिस, 'एडवांस टिप' की जांच के आदेश
उबर का 'एडवांस टिप' फीचर कंपनी की ब्रांड छवि के लिए एक कठिन चुनौती बन गया है. जहां एक ओर कंपनी इसे ड्राइवर की कमाई बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने का जरिया बता रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक इसे शोषण और अनुचित दबाव मान रहे हैं
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Uber: हाल ही में उबर द्वारा पेश किया गया 'एडवांस टिप' फीचर उपभोक्ताओं के बीच भारी विवाद का कारण बन गया है. इस फीचर के तहत, उबर अपने यूजर्स से राइड बुक करते समय 50 रुपए, 75 रुपए या 100 रुपए की "टिप" जोड़ने का विकल्प देता है. कंपनी का कहना है कि इससे ड्राइवर के ट्रिप को स्वीकार करने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, इस सुविधा को लेकर सोशल मीडिया पर कंपनी को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का आरोप है कि उबर इस फीचर के जरिए ग्राहकों को सेवा प्राप्त करने से पहले ही अतिरिक्त भुगतान करने के लिए मजबूर कर रही है, जो कि एक प्रकार का शोषण है.
उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सरकारी हस्तक्षेप
इस विवाद के बाद केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उबर को औपचारिक नोटिस भेजा है. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी इस फीचर की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "अनैतिक और शोषणकारी" करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह एक अनुचित व्यापार प्रथा है और इसकी पूरी जांच की जाएगी. मंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि यह सुविधा ग्राहकों को धोखे में डालती है और उनकी विवशता का फायदा उठाती है.
ग्राहकों का गुस्सा: ‘टिप’ नहीं, यह तो 'रिश्वत' है
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस फीचर की तुलना रेस्टोरेंट में वेटर को सेवा देने से पहले पैसे देने से की है. एक यूजर ने लिखा कि अब ड्राइवर केवल उन राइड्स को ही स्वीकार कर रहे हैं जिनमें एडवांस टिप शामिल हो, जिससे आम ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. एक अन्य यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा, "उबर अब कहता है कि अगर आप चाहते हैं कि कोई ड्राइवर आपकी राइड एक्सेप्ट करे, तो पहले पैसे दो. बहुत बढ़िया कदम!"
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कई यूजर्स ने यह भी कहा कि टिप एक प्रकार की 'धन्यवाद राशि' होनी चाहिए, जो सेवा के बाद दी जाती है – न कि सेवा पाने के लिए पहले से ही भुगतान करने का दबाव. कुछ लोगों ने इसे सीधे तौर पर 'रिश्वत' बताया और कहा कि अब ग्राहक सिर्फ समय पर पिक-अप पाने के लिए अतिरिक्त भुगतान कर रहे हैं.
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पहले भी घिरी है उबर विवादों में
यह पहली बार नहीं है जब उबर को उपभोक्ता संरक्षण निकाय से फटकार मिली हो। जनवरी में भी CCPA ने उबर और ओला दोनों को नोटिस जारी किए थे, जिनमें शिकायत की गई थी कि ये कंपनियां ग्राहकों से उनके फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम (एंड्रॉयड या iPhone) के आधार पर अलग-अलग किराया वसूल रही थीं। इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल असमानता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के भरोसे को भी गहरा झटका देती हैं.
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भरोसे की परीक्षा में उबर
उबर का 'एडवांस टिप' फीचर कंपनी की ब्रांड छवि के लिए एक कठिन चुनौती बन गया है. जहां एक ओर कंपनी इसे ड्राइवर की कमाई बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने का जरिया बता रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक इसे शोषण और अनुचित दबाव मान रहे हैं. अब देखना यह होगा कि उबर इस विवाद से कैसे निपटती है और क्या सीसीपीए की जांच के बाद कंपनी को अपने इस फीचर में कोई बदलाव करना पड़ेगा. लेकिन एक बात साफ है—उपभोक्ता अब जागरूक हैं और किसी भी तरह की जबरदस्ती या छलावे को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे.