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एथेनॉल मिलाने से इंजन खराब? मोदी सरकार ने किया सच का खुलासा

E20: हरदीप पुरी ने साफ शब्दों में कहा है कि “कोई विवाद नहीं है, और न ही किसी तरह की कोई नीति में बदलाव की योजना है.” वहीं विपक्ष इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में जुट गया है, खासकर महाराष्ट्र और अन्य कृषि प्रधान राज्यों में....

Source: Wikipedia/PetrolPump
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Petrol Pump: भारत सरकार द्वारा पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाने की नीति (E20) को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है. जहां केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आमदनी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक दूरदर्शी पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इस नीति पर सवाल उठा रहा है, खासतौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार की भूमिका को लेकर. सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक यह मुद्दा इन दिनों चर्चा का केंद्र बन गया है. इस पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सामने आकर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है.

मोदी सरकार की सफाई: "कोई असर नहीं...

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल का वाहनों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. उन्होंने कहा, "इथेनॉल मिलाया हुआ पेट्रोल गाड़ियों पर कोई असर नहीं डालता है. जो भी विवाद खड़ा किया गया है, वह पूरी तरह बेबुनियाद है.''पुरी ने यह भी कहा कि शायद अब एथेनॉल की मात्रा को 20 फीसदी तक ही सीमित रखा जाएगा. इसकी लिमिट बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है. इसके माध्यम से किसान अब ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया सहारा मिला है.उन्होंने इस बात की भी याद दिलाई कि सरकार ने 10% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य नवंबर 2020 तक रखा था, जिसे समय से पाँच महीने पहले हासिल कर लिया गया था. इसी तरह 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य जो 2030 के लिए निर्धारित था, उसे भी पाँच साल पहले ही पूरा कर लिया गया है.

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गडकरी परिवार पर विपक्ष का हमला

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जहां सरकार इसे किसानों और पर्यावरण के लिए लाभकारी बता रही है, वहीं सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक और नैरेटिव जोर पकड़ रहा है. कई लोग यह सवाल कर रहे हैं कि आम आदमी को आखिर इस नीति से क्या मिला? पेट्रोल की कीमतें कम नहीं हुईं, उल्टे शिकायतें बढ़ी हैं कि गाड़ियों का माइलेज घटा है, इंजन पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं और रखरखाव की लागत बढ़ गई है. इन बहसों के बीच नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी और सारंग गडकरी का नाम भी उछला, जिन्हें लोग कथित तौर पर एथेनॉल से जुड़ी कंपनियों में लाभार्थी मान रहे हैं. आरोप लगे कि एथेनॉल से फायदा जनता या किसानों को नहीं, बल्कि गडकरी परिवार को हुआ है.

भविष्य क्या कहता है?

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अब तक की स्थिति में केंद्र सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही. हरदीप पुरी ने साफ शब्दों में कहा है कि “कोई विवाद नहीं है, और न ही किसी तरह की कोई नीति में बदलाव की योजना है.” वहीं विपक्ष इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में जुट गया है, खासकर महाराष्ट्र और अन्य कृषि प्रधान राज्यों में.
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह विवाद और गहराता है या सरकार अपनी बात जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचा पाती है. फ़िलहाल इतना तय है कि E20 सिर्फ एक ईंधन का नाम नहीं, बल्कि अब यह नीति, राजनीति और निजी हितों के बीच का एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है.

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