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Lawrence Bishnoi v/s Dawood Ibrahim - कौन बड़ा Don ?

लॉरेंस बिश्नोई जिसकी उम्र सिर्फ़ 31 साल है उसने दाऊद वाले दौर की यादें ताज़ा कर दी हैं। इसीलिए सोशल मीडिया पर लोग उसकी तुलना दाऊद से करने लगे हैं, कुछ लोग उसे दाऊद से भी दो कदम आगे बता रहे हैं। आज अधूरा सच में आपको लॉरेंस का पूरा सच बताएंगे। इस वीडियो को अंत तक ज़रूर देखियेगा।

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Lawrence Bishnoi का नाम आजकल आपको हर तरफ सुनाई दे रहा होगा। महाराष्ट्र में एक बड़े नेता की हत्या होती है और ये गैंग फिर से रातों रात सुर्ख़ियों में आ जाता है। हालांकि ये कहना ग़लत नहीं होगा कि ये गैंग कभी सुर्ख़ियों में रहा नहीं। Almost हमेशा ही रहा। सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस हो, कनाडा में निज्जर की हत्या हो, बाबा सिद्दकी की हत्या हो या फिर Ofcourse Salman Khan को बार बार धमकी देना हो। कॉलेज का एक लड़का जो कॉलेज की राजनीति करते करते जेल चला गया और वहां से एक ऐसे गैंग का सरगना बन गया जिसके सदस्य नेशनल इंटरनेशनल हर जगह फैले हुए हैं। खैर, मौजूदा स्थिति में लॉरेंस के मन में क्या है? क्या वो खुद को दाऊद से बड़ा डॉन समझ रहा है? या फिर दाउद से बड़ा डॉन वो अब तक बन चुका है?

आज हम आपको लॉरेस बिश्नोई का पूरा सच बताएंगे। क्या वो दाऊद से बड़ा डॉन बनने का सपना देखते हुए इस तरह के काम कर रहा है? वो सच में माफिया है या फिर देशभक्त? सोशल मीडिया पर तो लॉरेंस को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में आपके लिए हम भी लेकर आए हैं ये स्पेशल रिपोर्ट। लॉरेंस को समझने के लिए सबसे पहले तो 1993 का जिक्र करना पड़ेगा। ये वो साल था जब इस लड़के का जन्म हुआ।

आपको लग रहा होगा कि मैं आपको कोई इमोशनल सी कहानी सुनाऊंगी। बताऊंगी कि किसी गरीब परिवार में उसका जन्म हुआ, बचपन बड़ी परेशानी में बीता…इसलिए वो गैंगस्टर बन गया। नहीं ऐसा कुछ नहीं है। दरअसल लॉरेंस का जन्म एक भरे पूरे परिवार में हुआ। लॉरेंस की स्कूलिंग भी ठीक ठाक हुई, उसने जब कॉलेज में एडमिशन लिया उस वक़्त उसको छात्र राजनीति का चस्का लगा। और भाई ये चस्का तो बहुत बुरा होता है, ये तो बहुत बुरी लत है जो लॉरेंस को लग चुकी थी।

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कॉलेज में अपना ख़ुद का संगठन बनाने वाला लॉरेंस पहला चुनाव हार गया। SOPU नाम से बनाए गये इस संगठन को जिसने हराया, उससे लॉरेंस की दुश्मनी हो गई, फिर एक दिन ख़बर आई कि Rivalry Gang ने लॉरेस की गर्लफ़्रेंड का मर्डर कर दिया, जिसका बदला लेने के लिए तो लॉरेंस तो बंदूक़ उठाई ही, लेकिन ऐसी बंदूक़ उठाई कि वो जेल भले ही चला गया लेकिन उस बंदूक़ को छोड़ने की नौबत कभी नहीं आई। जिस तरह से एक दौर में दाऊद ने अपने पैर पसारे थे ठीक उसी राह पर लॉरेंस चल रहा है। इसीलिए उसके लिए भी दो ख़ेमे बंटे हुए हैं। एक तरफ़ कुछ लोग उसे गैंगस्टर कह रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ कुछ लोग रॉबिनहुड।

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90 का वो दौर आपको याद होगा जब गैंगस्टर्स जबरन वसूली वाले कॉल किया करते थे, अमीर लोगों को अपना निशाना बनाया करते थे। उस वक़्त पैसे वालों के लिए दिवाली तक मनाना भारी हो गया था। उस वक़्त दाऊद के गुर्गे जमकर वसूली किया करते थे और बिज़नेस करने वालों की बड़ी आफ़त थी, दूसरी तरफ़ ये वो दौर भी था जिसमें दाऊद ने अपने साथ कई युवाओं को जोड़ा, बेरोज़गारों को रोज़गार दिया। उस वक़्त ये गैंगस्टर्स रियल एस्टेट की तरफ़ बढ़ गये थे। अब देखिये जहां एक एक विवाद को निपटाने के लिए 20-20 साल का वक़्त लग जाता है वहां पर इन गैंगस्टरों की So called अदालतों में 10-20 दिनों में केस सॉल्व हो जाया करता था।

अब लॉरेंस की बात कर लेते हैं, लॉरेंस को लेकर लोगों को लग रहा है कि वो हिंदू डॉन है। वो सनातन की बात कर रहा है, वो सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है स्टाइल में आगे बढ़ रहा है, वो हिंदुओं के देवी देवताओं को गाली देने वालों को सबक़ सिखाने की बात करता है, इस तरह से लोग उसका महिमा मंडन कर रहे हैं। छोटे छोटे बच्चों की रील्स वायरल हो रही है जिसमें वो बढ़े होकर लॉरेंस बिश्नोई बनने की बात कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर तो लॉरेंस को देशभक्त के तौर पर दिखाया जा रहा है।

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लॉरेंस की निजी विचारधारा कुछ भी हो लेकिन काम करने का स्टाइल पूरी तरह से दाऊद जैसा नज़र आ रहा है। अपने धर्म को लेकर पक्का होना और उसूलों पर चलना। आप सोचिए एक 31 साल का लड़का जो जेल में बैठे बैठे आपको दाऊद वाला दौर याद दिला दे, जो जेल में बैठे बैठे अंडरवर्ल्ड को हिलाकर रख दे, उसे लेकर और क्या कहा जाए। शायद इसीलिए अब लोगों ने उसकी तुलना दाऊद से करनी भी शुरू कर दी है।


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